जब रामजन्मभूमि का भव्य मन्दिर निर्माण प्रारंभ हुआ था तो मेरे मन में अयोध्या यात्रा एवं प्रभु राम के दर्शन की इच्छा होती थी। अपनी पुरानी अयोध्या यात्रा की यादें, वर्षों पुराने जर्जर हो चुके घर व मंदिरों के बीच संकरी गलियों में कहीं खो चुके "अष्टचक्रा नवद्वारा" अयोध्या के गौरव - वैभव का चीत्कार एवं खाकी वर्दी की सघन जांच के बीच सात बैरिकेड पार कर तिरपाल में विराजते अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के दर्शन का विचार कर अपार पीड़ा से आँखें नम हो जाती थीं।
परन्तु 22 जनवरी, 2024 को श्री अयोध्या जी में नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के वैश्विक उत्साह ने मेरी उत्सुकता को और बढ़ा दिया। अयोध्या, जो सदियों से संघर्ष और विवाद का केंद्र रही थी, अब पुनः अपने वास्तविक अयुद्ध स्वरूप को प्राप्त कर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का परावर्तन करने की दिशा में बढ़ रही है।वा देते हैं।
मेरी यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली से विमान द्वारा महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अयोध्या धाम के लिए हुई। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा 318 एकड़ भूमि पर अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाया गया है जिसे देखकर स्वयं महसूस होता है कि ये एक स्टेट ऑफ द आर्ट एयरपोर्ट है। देश और विदेश के पर्यटकों को यहां तक पहुंचाने के लिए इसके प्रथम चरण निर्माण में 8000 वर्ग मीटर का टर्मिनल भवन निर्मित किया गया है। इस एयरपोर्ट को ऐसे मानक का बनाया जा रहा है कि यह 24 वायुयानों को एक साथ व्यवस्थित कर सकता है। एयरपोर्ट से अयोध्या की ओर बढ़ते हुए मैंने देखा कि सभी संपर्क राजमार्गों को विस्तार दिया जा रहा है, चौड़ी सड़कें और सुन्दर पथ-प्रकाश की व्यवस्था अयोध्या के बदलाव की कहानी कह रहे थे।
अयोध्या पहुंचते ही मेरी नज़र सबसे पहले धर्मपथ के स्वागत द्वार पर पड़ी जिसमें सहस्रदल कमल के केंद्र में भगवान सूर्य अपनी रश्मियों के साथ अपने सप्त अश्वों वाले रथ पर सवार हैं जो अयोध्या के महान सूर्यवंशी राजाओं की गौरव गाथा को प्रभाषित कर रहा था। आगे बढ़ते हुए इस मार्ग के दोनों तरफ सूर्यस्तंभ एक निराली छटा बिखेर रहे थे। अयोध्या के प्रमुख मार्गों को धर्म पथ, भक्ति पथ, राम जन्मभूमि पथ और श्रीराम पथ नाम दिया गया है। यह देखकर...
मुझे एहसास हुआ कि अयोध्या को एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का मोदी सरकार का प्रयास अत्यंत सराहनीय है।
अयोध्या पहुंचने का मुख्य उद्देश्य था श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन करना। मंदिर का भव्य निर्माण और उसकी आभा ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। मंदिर का निर्माण भारतीय मंदिर वास्तुकला के अनुसार किया गया है और उसकी भव्यता और सौंदर्य अद्वितीय है। जब मैंने रामलला के विग्रह का दर्शन किया तो नयनाभिराम दृश्य था, साक्षात् बालक राम की श्यामल छवि का दर्शन कर आँखें भावना से सजल हो उठीं। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तैयारियों की झलक ने मेरी यात्रा को और भी विशेष बना दिया। लोगों के रुकने की चाक चौबंद टेंट सिटी की व्यवस्थाएं, इलेक्ट्रिक बसों का प्रबंधन आदि, 2014 के बाद के नए भारत की प्रबंधन शक्ति का परिचय दे रहे थे।
अयोध्या भ्रमण के दौरान मुझे वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को देखने का अवसर भी मिला। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा 3000 करोड़ रुपये की 1200 एकड़ में फैली नव अयोध्या परियोजना की योजना बन रही है। यहां पर राज्य अतिथि गृह बनाया जा रहा है। अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर लगभग 80 एकड़ भूमि पर आवासीय योजनाएं लाने का कार्य चल रहा है। ये सभी योजनाएं अयोध्या को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए की जा रही हैं।
मुझे जानकारी मिली की अयोध्या को हर तरह से विकसित बनाने की दिशा में 10 वर्षीय योजना 2031 में पूर्ण होगी और तब तक अयोध्या का पूर्ण रूप से कायाकल्प हो जाएगा। इस क्रम में लगभग 85000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना सुनिश्चित है। इस 10 वर्षीय योजना में अयोध्या विकास प्राधिकरण 875 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में क्षेत्रीय अवसंरचनाओं एवं पर्यटन के विकास पर कार्य करेगा। इसमें 31.5 स्क्वायर किलोमीटर में मूल अयोध्या शहर तथा 133 वर्ग किलोमीटर में इसके मास्टर प्लान की योजना रहेगी। इस प्रकार से अयोध्या को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
विकास की इस प्रक्रिया में इस बात का विशेष ध्यान दिया जाएगा कि इतने बड़े पैमाने पर पर्यटकों के आवागमन से यहां की जनसंख्या तथा पर्यावरण को कोई क्षति न पहुंचे। इसके लिए अयोध्या का विकास 8 मूल बिंदुओं पर हो रहा है, सुंदर, स्वच्छ, कार्य कुशल, सुगम, अनुभवात्मक, आधुनिक, सांस्कृतिक एवं स्वस्थ अयोध्या विकसित की जा रही है।
गुप्तार घाट से नए घाट तक 7 किलोमीटर के हिस्से को रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करने की योजना ने मुझे बेहद प्रभावित किया। गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर यहां फुटपाथ और स्ट्रीट लाइट्स सहित इन्फ्रा का निर्माण हो रहा है। इस परियोजना के तहत लग्जरी क्रूज की भी योजना बनाई गई है, जिससे पर्यटक डेढ़ घंटे लंबी यात्रा का आनंद ले सकेंगे। यह परियोजना अयोध्या को त्यौहारी पर्यटन स्थल के रूप में उभारने में सहायक होगी।
पर्यटन के माध्यम से अयोध्या की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का अनुमान है कि राम मंदिर निर्माण के बाद प्रतिदिन लगभग 2 लाख तीर्थ यात्री अयोध्या आएंगे, जो पर्व और त्योहारों के समय 5 लाख तक भी पहुंच सकते हैं। इस वृद्धि से न केवल स्थानीय व्यापारियों को लाभ होगा बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2025 में राम मंदिर सहित अन्य पर्यटन से उत्तर प्रदेश को 25000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर लाभ होगा।
सरकार द्वारा अयोध्या में रेल, रोड तथा वायु सेवाओं की बेहतर कनेक्टिविटी को सुनिश्चित करने के लिए 17 विभागों में 264 से अधिक परियोजनाएं चलाई जा रही हैं जिनकी कुल कीमत 3923 करोड़ रुपये है। रेलवे द्वारा अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन परियोजना के अंतर्गत 443 करोड़ रुपये खर्च करके भारतीय वास्तु के अनुसार नवनिर्माण किया जा रहा है। लखनऊ और गोरखपुर राजमार्ग पर 65 किलोमीटर लंबा रिंग रोड बनाने की योजना है जिससे अयोध्या की यात्रा सुगम और सुलभ हो जाएगी। अयोध्या विश्व भर से बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी में लगा हुआ है और इसी क्रम में आज अयोध्या में 5 मल्टी लेवल पार्किंग स्थल निर्माणाधीन हैं।
अयोध्या के धार्मिक स्थलों का नवीनीकरण भी तेजी से हो रहा है। जानकी घाट, बड़ा स्थान, दशरथ भवन, राम कचहरी, सियाराम किला, दिगंबर अखाड़ा, भरत किला, कालेराम मंदिर, नेपाली मंदिर आदि को संवारा जा रहा है। इन स्थलों के संरक्षण से अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास किया जा रहा है।
अयोध्या का दीपोत्सव अपने आप में एक अनूठा पर्व बनकर विश्व पटल पर सामने आया है। 2017 से अयोध्या हर साल दीपावली के अवसर पर एक दिन में एक शहर में सबसे ज्यादा दीये जलाने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो रहा है। लाखों लोग यह दीपोत्सव देखने आते हैं और इसे एक नए त्यौहारी पर्यटन के रूप में पहचान मिली है। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या की सड़कों पर रोशनी की छटा देखते ही बनती है। अयोध्या का यह दीपोत्सव सत्य ही त्रेतायुग के उस शुभ समय को जीवंत कर देता है जब हमारे प्रभु राम वनवास पूर्ण कर अयोध्या आये थे।
अयोध्या का आर्थिक विकास भी तेजी से हो रहा है। 2021-22 में अयोध्या का निर्यात 110 करोड़ रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 254 करोड़ रुपये हो गया। पारबॉइल्ड राइस, बिटुमिनस कोयला, आयुर्वेद पद्धति की दवाएं, क्राफ्ट पेपर, वुड पल्प बोर्ड, बेकरी मशीनरी आदि का निर्यात बढ़ा है। यह दिखाता है कि अयोध्या की व्यापार क्षमता में भी वृद्धि हो रही है।
अयोध्या में चल रही विकास योजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। इंफ्रा निर्माण, औद्योगिक गतिविधियां, पर्यटन तथा सेवा क्षेत्र में वृद्धि हो रही है। इससे स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है और उनकी जीवन शैली भी बदल रही है।
मेरी अयोध्या यात्रा ने मुझे न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया, बल्कि मैंने अयोध्या के विकास की गाथा को भी करीब से देखा। राम मंदिर का निर्माण और अयोध्या के विकास की दिशा में चल रहे प्रयासों ने मुझे यह एहसास दिलाया कि यह शहर न केवल भारत के इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि भविष्य में भी इसकी विशेष पहचान बनी रहेगी। अयोध्या न केवल एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगर के रूप में जाना जाएगा, बल्कि प्रदेश और देश की आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा, जिससे समाज के हर वर्ग को बड़ा लाभ मिलेगा।
सरकार द्वारा अयोध्या को एक वैश्विक शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है और जिस प्रकार से ईसाइयों के लिए वेटिकन, मुसलमानों के लिए मक्का है उसी प्रकार से हिंदुओं के लिए अयोध्या को एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है।