सेमीकंडक्टर क्रांति: भारत की तकनीकी व भू-राजनीतिक प्रभाव का नया युग
Lokmata Ahilyabai

11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश की घोषणा दी। पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत के प्रवेश को भारत के बहुत सामर्थ्यवान बाजार हेतु तीन महत्वपूर्ण कारकों को संबोधित बताया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश हेतु उठाए गए कदमों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश हेतु विषय को समय पर समझने की आवश्यकता थी।र उद्योग

चौथी औद्योगिक क्रांति में देश को वैश्विक शीर्ष पर स्थापित करने और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को एक मजबूत सेमीकंडक्टर उद्योग विकसित करना होगा। सेमीकंडक्टर अभी आधुनिक तकनीकों हेतु आधारभूत हैं, जो स्मार्टफोन, कंप्यूटर और उन्नत विनिर्माण प्रणालियों को बनाय रखने को बढ़ावा देते हैं।

सेमीकंडक्टर सेक्टर राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और दुनियावी ढांचा प्रणालियों के मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में अहम है और इसके अंतर्गत रक्षा, ऑटोमोबाइल और स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक वैश्विक ढांचा तैयार होता है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश हेतु भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में सेमीकंडक्टर मिशन की स्थापना, डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम, डिस्प्ले फैब्रिकेशन यूनिट हेतु प्रोत्साहन और सेमीकंडक्टर फैब हेतु प्रोत्साहन शामिल हैं।

इसके अलावा, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश हेतु प्रमुख निवेशक डॉक्स्ट ने ओसियन के साथ साझेदारी कर 3.50 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जो सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्रिकेशन जैसे विभिन्न उच्च उपयोगकर्ता उत्पादों को प्रदर्शित करता है।

भारत ने आत्मनिर्भरता हासिल करने हेतु किए गए 150 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 200 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को 2025 तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।

“Leadership is defined not by authority, but by service.”

अमेरिका, चीन और जापान के आर्थिक परिप्रेक्ष्य में सेमीकंडक्टर उद्योग

अमेरिका ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 2022 में लगभग 287 बिलियन डॉलर का निवेश किया और लगभग 250,000 नौकरियों का सृजन किया। अमेरिका ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश हेतु *चिप्स एंड साइंस एक्ट* के तहत 52 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।

चीन सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश करने का प्रयास कर रहा है। चीन द्वारा अनुसंधान और विकास निवेश हेतु 5G और AI जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश का लक्ष्य रखा है। चीन ने 2035 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर लीड करने का लक्ष्य रखा है।

चीन सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश करने का प्रयास कर रहा है। चीन द्वारा अनुसंधान और विकास निवेश हेतु 5G और AI जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश का लक्ष्य रखा है। चीन ने 2035 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर लीड करने का लक्ष्य रखा है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत का निवेश, वैश्विक निवेश के साथ प्रतिस्पर्धा हेतु तैयार हो रहा है। भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से यह निवेश भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।

भारत, वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग का नया सितारा

भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में एक नए सितारे के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट्स की स्थापना, *India Semiconductor Mission (ISM)* और विभिन्न सरकारी पहल व निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से इस उद्योग को बढ़ावा दिया है।

प्रमुख परियोजनाएँ और सहयोग

माइक्रोन की OSAT इकाई, साणंद, गुजरात** माइक्रोन ने साणंद, गुजरात में OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) यूनिट स्थापित की है। कुल निवेश ₹2.75 बिलियन है और उत्पादन 2023 में शुरू होने की उम्मीद है।

टाटा की पहली फैब फैकेलिटी प्लांट, धोलीरा, गुजरात

टाटा समूह ने धोलीरा, गुजरात में अपनी पहली फैब सुविधा स्थापित की है, जिसका उद्देश्य चिप्स का निर्माण करना है।

टावर की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर असेम्बली और टेस्ट सुविधा, साणंद, गुजरात

टावर सेमीकंडक्टर ने साणंद में अपनी स्वदेशी असेम्बली और टेस्ट सुविधा शुरू की है। इसका लक्ष्य मार्च 2024 तक प्रति माह 50,000 वेफर्स का उत्पादन करना है।

भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन प्रधानमंत्री मोदी की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, सेमीकंडक्टर डिजाइन, प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा और नवाचार में अग्रणी बनाना है।"*

भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन प्रधानमंत्री मोदी की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, सेमीकंडक्टर डिजाइन, प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा और नवाचार में अग्रणी बनाना है।
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